Are you the publisher? Claim or contact us about this channel


Embed this content in your HTML

Search

Report adult content:

click to rate:

Account: (login)

More Channels


Channel Catalog


Articles on this Page

(showing articles 881 to 900 of 1282)
(showing articles 881 to 900 of 1282)

older | 1 | .... | 43 | 44 | (Page 45) | 46 | 47 | .... | 65 | newer

    0 0

    दिनांकः

     

    सेवा में,

    जन सूचना अधिकारी/तहसीलदार,

    तहसील-रसूलाबाद

    जनपद- कानपुर देहात, उ0प्र0।

     

    विषयः सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन।

     

    read more


    0 0

    Author: 
    अन्नू आनंद

    स्वच्छता अभियान की ‘चैम्पियन’ पंचायतों की महिलाएँ



    .राजस्थान के ब्लाक आमेर में गाँव नांगल सुसावतान पंचायत की युवा सरपंच चांदनी तेज-तेज कदमों से गाँव के हर घर में घुसती और वहाँ बने शौचालय का दरवाजा खोलकर हमें दिखाती। गाँव के कच्चे-पक्के सभी घरों में शौचालय बने हुए थे। चांदनी पिछले दो महीनों से इसी काम में लगी है।

    22 साल की चांदनी बीएड परीक्षा की तैयारी कर रही है। मई माह में ही उसकी परीक्षाएँ भी हैं। लेकिन उसे गाँवों के लोगों को खुले में शौच से मुक्त कराने की चुनौती की अधिक चिन्ता है। वह बताती है कि काम सरल नहीं था। बहुत से लोगों के घर पहले से शौचालय बने थे लेकिन उनके नाम सूची में थे। इन नामों को सूची से निकालना फिर नए नामों को शामिल करना, परिवारों को शौचालय निर्माण के लिये सरकार द्वारा 15 हजार रुपए का खर्च दिये जाने की जानकारी देना, फिर राशि को उनके अकाउंट में डलवाना। ये सभी प्रक्रिया पूरी करने में काफी भाग दौड़ करनी पड़ी।

    read more


    0 0


    .राष्ट्रीय हरित पंचाट के इतिहास में चोरी और सीनाजोरी की ऐसी दबंग मिसाल शायद ही कोई और हो। शासन, प्रशासन से लेकर निजी कम्पनी तक कई ऐसे हैं, जिन्होंने हरित पंचाट के आदेशों को मानने में हीला-हवाली दिखाई है। पंचाट के कई आदेश हैं, जिनकी अनदेखी आज भी जारी है; किन्तु इससे पहले शायद ही कोई ऐसा आरोपी होगा, जिसने आदेश की अवमानना करने पर दंडित करने की हरित पंचाट की शक्ति को चुनौती देने की हिमाकत की हो। विश्व सांस्कृतिक उत्सव (11-13 मार्च, 2016 ) के आयोजक ने की है।

    हालांकि हरित पंचाट ने यह स्पष्ट किया कि आदेश की अवमानना होने पर दंडित करने के हरित पंचाट को भी वही अधिकार प्राप्त हैं, जैसे किसी दूसरे सिविल कोर्ट को, किन्तु चुनौती देकर आयोजक के वकील ने यह सन्देश देने की कोशिश तो की ही कि वह आदेश की अवमानना करे भी तो हरित पंचाट उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

    read more


    0 0

    Author: 
    अनिल सौमित्र

    महाराष्ट्र में पानी के लिये हाहाकार मचा हुआ है। लातूर और जलगाँव में पानी के लिये लोग कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले रहे हैं। हालात काबू में रखने के लिये प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ रही है। लेकिन बुरहानपुर के लोगों ने पानी की समस्या को सावधानी और सतर्कता के साथ सुलझाने की कोशिश की है। सोच और संकल्प यह है कि न तो पानी की रेलगाड़ी बुलाने की नौबत आये और न ही पानी की छीना-झपटी रोकने के लिये पुलिस को धारा 144 लगानी पड़े। गाँव के लोग पानी के लिये लड़ नहीं रहे, पानी बचाने का प्रयास कर रहे हैं। किसान को याद हो चला है कि वे पानी बना तो नहीं सकते, हाँ! पानी को बचा जरूर सकते हैं।

     

    Dhamangao (4)

    जसौंदी की सरपंच शोभाबाई रमेश प्रचंड गर्मी और पानी की किल्लत से दो-दो हांथ करने के लिये तैयार हैं। शोभाबाई कहती हैं- हमारी क्षेत्र की जनप्रतिनिधि अर्चना दीदी हमारे साथ हैं, हम पानी की किल्लत और सूखे से पार पा लेंगे।

    read more


    0 0

    विश्व पर्यावरण दिवस, 05 जून 2016 पर विशेष


    .आज सर्वत्र पर्यावरण क्षरण की चर्चा है। हो भी क्यों न, क्योंकि आज समूचे विश्व के लिये यह सवाल चिंता का विषय है। इसके बारे में विचार से पहले हमें इतिहास के पृष्ठों को पलटना होगा। देखा जाए तो प्राचीनकाल से ही हमारे जीवन में परम्पराओं-मान्यताओं का बहुत महत्त्व है।

    हमारे पूर्वजों ने धर्म के माध्यम से पर्यावरण चेतना को जिस प्रकार हमारे जन-जीवन में संरक्षण प्रदान किया, वह उनकी गहन व्यापक दृष्टि का परिचायक है। परम्पराएं संस्कृति के क्रियान्वित पक्ष की सूक्ष्म बिंदु होती हैं। हमारी संस्कृति वन प्रधान रही है। उपनिषदों की रचना भी वनों से ही हुई है।

    read more


    0 0


    बड़े तालाब के आसपास से सारा अवैध निर्माण हटाने के आदेश, बड़े पैमाने पर संरक्षण उपाय अपनाए जाएँ
    .भोपाल। राष्ट्रीय हरित पंचाट (एनजीटी) का ताजा फैसला भोपाल की पहचान बड़ी झील के लिये बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। एनजीटी ने भोपाल नगर निगम और जिला प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी अनदेखी के चलते ही बड़ी झील के आसपास इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो गया है कि झील के अस्तित्त्व को ही खतरा उत्पन्न हो गया है।

    पंचाट ने बड़े तालाब के जल भराव स्तर से 50 मीटर के दायरे में आने वाले सभी प्रकार के अतिक्रमण तत्काल हटाने के आदेश दिये हैं। इसके अलावा नगर निगम को निर्देश दिया गया है कि वह इस पूरे क्षेत्र के अतिक्रमणों की सूची तैयार करके एनजीटी और जिलाधिकार कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत करे। इस सूची का अध्ययन करने के बाद अवैध निर्माण को नोटिस देकर हटाया जाएगा।

    read more


    0 0

    विश्व पर्यावरण दिवस, 05 जून 2016 पर विशेष


    .वायुमण्डल, जलमण्डल और अश्ममण्डल- इन तीन के बिना किसी भी ग्रह पर जीवन सम्भव नहीं होता। ये तीनों मण्डल जहाँ मिलते हैं, उसे ही बायोस्फियर यानी जैवमण्डल कहते हैं। इस मिलन क्षेत्र में ही जीवन सम्भव माना गया है। इस सम्भव जीवन को आवृत कर रक्षा करने वाले आवरण का नाम ही तो पर्यावरण है।

    जीवन रक्षा आवरण पर ही प्रहार होने लगे.... तो जीवन पुष्ट कैसे रह सकेगा? हर पर्यावरण दिवस की चेतावनी और और समाधान तलाशने योग्यमूल प्रश्न यही है, किन्तु पर्यावरण दिवस, 2016 की चिन्ता खास है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने ‘वन्य जीवन के अवैध व्यापार के खिलाफ जंग’ को पर्यावरण दिवस, 2016 का लक्ष्य बिन्दु बनाया है।

    read more


    0 0

    Author: 
    जीशान अख्तर

    विश्व पर्यावरण दिवस, 05 जून 2016 पर विशेष


    .झाँसी शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर खरेला गाँव है। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच गाँव बेहद शान्त लगता है। खबर थी कि यहाँ के तालाब बुरे हाल में हैं। जब बूँद-बूँद पानी के लिये लोग भटक रहे हों। पानी के लिये संघर्ष बनी हो। पुलिस के पहरे के बीच पानी बँट रहा हो। पानी बिक रहा हो। ऐसे में तालाब जिन्हें भुला दिया गया, काफी प्रासंगिक हो जाते हैं।

    इसी प्रसंग के साथ गाँव में घुसने के बाद तालाबों को तलाश करते हैं, लेकिन निगाहों को कामयाबी नहीं मिलती। बातचीत के बीच गाँव के लोग बताते हैं जहाँ हम खड़े थे उसी जगह एक जिन्दा तालाब था। हैरत हुई कि जहाँ हम खड़े थे वहाँ कुछ साल पहले तक 7 बीघा में फैला तालाब हुआ करता था। 7 बीघा के मैदान को देख अन्दाजा लगाना मुश्किल था कि यहाँ कभी तालाब भी फैला हुआ था।

    read more


    0 0


    दिनांकः

    सेवा में
    जन सूचना अधिकारी
    जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय
    श्रम शक्ति भवन,
    रफी मार्ग, नई दिल्ली- 110001

    महोदय,

    सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत ‘केंद्रीय जल संसाधन व गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय’ की ‘जलाशयों के जीर्णोद्धार, मरम्मत और नवीकरण (Repair, Renovation and Restoration of water bodies) परियोजना’ के संबंध में निम्नलिखित सूचनाएँ उपलब्ध कराने की कृपा करें।

    1. आर्डर नम्बर 7/1/2009-WB में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि राज्य सरकार के अलावा ग्राम पंचायत/नगरपालिका/निगम, कृषि/समवर्गी क्षेत्र की पंजीकृत सोसाइटी, पब्लिक ट्रस्ट इत्यादि (Gram Panchayat/Municiplities/Corporations, Registered Societies in Agriculture/Allied Sector, Public Trusts etc) की जमीन पर स्थित जलाशयों के लिए केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट के तहत फंड देगी। अतएव अगर ग्राम पंचायत/नगरपालिका/निगम, कृषि/ समवर्गी क्षेत्र की पंजीकृत सोसाइटी और पब्लिक ट्रस्ट इत्यादि (Gram Panchayat/Municiplities/Corporations, Registered Societies in Agriculture/Allied Sector, Public Trusts etc) राज्य सरकार के जरिये न जाकर सीधे केंद्र सरकार को प्रस्ताव दें और 25 फीसदी फंड भी देने को तैयार हों तो क्या केंद्र सरकार इनके प्रस्तावों को अनुमति देगी।

    2. क्या सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए (Repair, Renovation and Restoration of water bodies) परियोजना’ प्रोजेक्ट के नियमों में कुछ बदलाव हुए हैं, अगर हाँ तो इसका विस्तृत ब्यौरा प्रदान करें।

    3. ‘जलाशयों के जीर्णोद्धार, मरम्मत और नवीकरण (Repair, Renovation and Restoration of water bodies) परियोजना को जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय में अधिकारी कौन है, नाम, पद, पते व फोन नम्बर की सूचना दें।

    read more


    0 0


    स्वामी सानंद गंगा संकल्प संवाद - 21वाँ कथन आपके समक्ष पठन, पाठन और प्रतिक्रिया के लिये प्रस्तुत है:

    तैने तो मेरे मन की कह दी


    .तरुण के भविष्य को लेकर मेरी चिन्ता बढ़ती गई। मैं क्या करुँ? इस प्रश्न के उत्तर की तलाश में मैं घर गया; पिताजी के पास। मेरी माँ तो तब नहीं थीं। मैंने पिताजी को अपनी चिन्ता से अवगत कराया। उसके बाद मैं दिल्ली लौट आया। लौटने पर सोचता रहा कि क्यों न मैं तरुण को गोद ले लूँ।

    मैंने पिताजी को अपना विचार बताया, तो वह बहुत खुश हुए। भरे गले से बोले- “तैने तो मेरे मन की कह दी।’’अब तरुण की माँ को तैयार करने की बात थी। यह जिम्मेदारी मैंने बाबा को दे दी। इस तरह आर्यसमाजी संस्कार विधि के साथ 1984 में मैंने तरुण को विधिवत गोद ले लिया।

    read more


    0 0


    .गत सौ वर्ष में मनुष्य की जनसंख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इसके कारण अन्न, जल, घर, बिजली, सड़क, वाहन और अन्य वस्तुओं की माँग में भी वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर काफी दबाव पड़ रहा है और वायु, जल तथा भूमि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हमारी आज भी आवश्यकता है कि विकास की प्रक्रिया को बिना रोके अपने महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को खराब होने (निम्नीकरण) और इनको अवक्षय को रोकें और इसे प्रदूषित होने से बचाएँ।

    प्रदूषण (Pollution) - प्रदूषण वायु, भूमि, जल या मृदा के भौतिक, रासायनिक या जैवीय अभिलक्षणों का एक अवांछनीय परिवर्तन है। अवांछनीय परिवर्तन उत्पन्न करने वाले कारकों को प्रदूषक (प्लूटैंट) कहते हैं। पर्यावरण के प्रदूषण को नियंत्रित तथा इसकी संरक्षा करने एवं हमारे पर्यावरण की गुणवत्ता सुधारने के लिये भारत सरकार द्वारा पर्यावरण (संरक्षा) अधिनियम, 1986 पारित किया गया है।

    वायु प्रदूषण और इसका नियंत्रण


    हम श्वसन सम्बन्धी आवश्यकताओं के लिये वायु पर निर्भर करते हैं। वायु प्रदूषक सभी जीवों को क्षति पहुँचाते हैं। वे फसल की वृद्धि एवं उत्पाद कम करते हैं और इनके कारण पौधे अपरिपक्व अवस्था में मर जाते हैं। वायु प्रदूषक मनुष्य और पशुओं के श्वसन तंत्र पर काफी हानिकारक प्रभाव डालते हैं। ये हानिकारक प्रभाव प्रदूषकों की सान्द्रता उद्भासन-काल और जीव पर निर्भर करते हैं।

    ताप विद्युत संयंत्रों के धूम्र स्तम्भ (स्मोकस्टैकस), कणिकीय धूम्र और अन्य उद्योगों से हानिकर गैसें जब नाइट्रोजन, ऑक्सीजन आदि के साथ (पारटिकुलेट) और गैसीय वायु प्रदूषक भी निकलते हैं। वायुमण्डल में इन अहानिकारक गैसों को छोड़ने से पहले इन प्रदूषकों को पृथक करके या निस्यांदित (फिल्टर्ड) कर बाहर निकाल देना चाहिए।

    read more


    0 0

    Author: 
    मीनाक्षी अरोड़ा, उमेश कुमार राय

    .हवा लोगों को जीवन देती है लेकिन अगर यही जीवन लेने लगे तो? सवाल अजीब जरूर है लेकिन इसे झुठलाया नहीं जा सकता है।

    हाल ही में एक संस्थान द्वारा किये गये एक शोध में पता चला है कि दिल्ली की आबोहवा जहरीली हो गयी है और लोगों की जिंदगी के दिन कम कर रही है। इंडियन इंस्टीट्यूट अॉफ ट्रौपिकल मेटीरियोलॉजी Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM) द्वारा किये गये शोध में पता चला है कि वायु प्रदूषण के चलते दिल्ली के लोगों के जीवनकाल से 6.4 वर्ष कम हो रहे हैं। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों की जिंदगी 80 वर्षों की है वे 76 वर्ष ही जी पायेंगे।

    read more


    0 0

    source: 
    सैण्ड्रप
    केन एवं बेतवा नदी गंगा नदी घाटी की प्रमुख उत्तर प्रवाही नदियां है। बुंदेलखंड क्षेत्र की जीवनदायनी मानी जाने वाली इन नदियों पर आज संकट आ खड़ा हुआ है। भारत सरकर की देश भर की नदियों को आपस में जोड़ने की योजना के तहत केन एवं बेतवा नदियों को भी आपस में जोड़ने की योजना है। केन-बेतवा नदीजोड़ योजना पर शायद सबसे पहले अमलीकरण प्रस्तावित है। जबसे इस परियोजना के बारे में नदियों को जोड़ने के लिए बने कार्यदल की सबसे पहली बैठक फरवरी 2003 में चर्चा हुई थी तभी से केन-बेतवा नदीजोड़ पर बुंदेलखंड के लोगों की प्रतिक्रियाएं बढ़नी शुरू हुईं। केन एवं बेतवा के बारे में लोगों का विरोध धीरे-धीरे यह एक आन्दोलन का स्वरूप लेता नजर आ रहा है।

    माना तो यह भी जा रहा है कि नदीजोड़ योजना के माध्यम से देश भर में नदियों एवं प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण की व्यापक कोशिश की जा रही है। सैण्ड्रप ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यशालाओं के माध्यम से इस विषय पर व्यापक व खुली चर्चा भी आयोजित की। सैण्ड्रप द्वारा प्रकाशित “डैम्स, रिवर्स एंड पिपुल”

    read more


    0 0

    Author: 
    आशीष सागर
    नदी जोड़ परियोजना के अंतर्गत कुल 30 नदी जोड़ प्रस्तावित हैं, जिसमें से 14 हिमालयी भाग के और 16 प्रायद्वीपीय भाग के हैं। इन्हीं नदी जोड़ परियोजनाओं में बुंदेलखंड की केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना लाइन में सबसे आगे है। परियोजना में कुल 7 बांध बनने वाले हैं और 1 बांध से 10 हजार हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आएगी। न केवल पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क, केन घड़ियाल अभ्यारण्य खत्म हो जाएंगे बल्कि बुंदेलखंड में पानी के लिए जंग होने के आसार भी हैं। परियोजना के खतरों से रूबरु करा रहे हैं आशीष सागर।

    केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना में सुप्रीम कोर्ट के सहमति के पश्चात सुकवाहा गांव में सर्वे कार्य चल रहा है। पन्ना टाइगर रिजर्व पार्क संरक्षित वन क्षेत्र है यदि लिंक बनता है तो यहां कि बायोडायवर्सिटी के विलोपन का खतरा है। साथ ही प्रस्तावित केन-बेतवा नदी गठजोड़ में डाउनस्ट्रीम में स्थित केन घड़ियाल अभ्यारण्य भी पूरी तरह जमींदोज हो जायेगा। तथा जल जमाव, क्षारीयकरण, जल निकास व जैव विविधता से जो उथल-पुथल होगी उससे न सिर्फ सैकड़ों वन्यजीवों पर संकट के बादल आयेंगे बल्कि बुंदेलखंड पानी की जंग के दौर से गुजरेगा ऐसे आसार हैं।

    राष्ट्रीय नदी विकास अभिकरण (एन.डब्लू.डी.ए.) द्वारा देश भर में प्रस्तावित तीस नदी गठजोड़ परियोजनओं में से सबसे पहले यूपी. एम.पी. के बुंदेलखंड क्षेत्र से केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना पर अमलीकरण प्रस्तावित है। 19 अप्रैल 2011 को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व मुखिया जयराम रमेश ने केन-बेतवा लिंक को एन.ओ.सी. देने से मना कर दिया है। क्योंकि वे खुद ही इस लिंक के दायरे में आ रहे पन्ना टाइगर नेशनल रिजर्व पार्क के प्रभावित होने के खतरे को भांप चुके थे। बड़ी बात ये है कि वर्ष 2009 तक परियोजना के डी.पी.आर. पर ही 22 करोड़ रु. खर्च हो चुके हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना को आगे बढ़ाने तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिये परियोजना को हाथ में लेने हेतु म.प्र. तथा उ.प्र. राज्यों व केंद्र सरकार के बीच इस पर 25 अगस्त 2005 को अंतिम रूप दिया गया। जिस पर म.प्र. व उ.प्र. के सी.एम. बाबूलाल गौड़ व मुलायम सिंह यादव ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किये थे।

    read more


    0 0

    Author: 
    उमेश कुमार राय

    .शोमैन राजकपूर से लेकर रोहित शेट्टी तक शायद ही कोई फिल्म निर्देशक हैं जिनकी फिल्मों में पानी से जुड़ा कोई दृश्य न हो। किसी रूमानी गाने का फिल्मांकन हो या कोई एक्शन सिक्वेंस उसे जल से जरूर जोड़ा जाता है। राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ का सदाबहार रोमांटिक गीत ‘प्यार हुआ इकरार हुआ तो प्यार से फिर क्यों डरता है दिल’ का वह दृश्य भला किसके दिल में न उतर गया होगा जिसमें तेज बारिश में एक ही छाते में खड़े होकर नर्गिस और राजकपूर एक दूसरे की आँखों में झांक रहे थे। बारिश और पानी ने उस आम दृश्य को खास बना दिया था। पानी से जुड़े इस तरह के अनगिनत शॉट्स हैं जिन्होंने फिल्मों की खुबसूरती में चार चाँद लगाये है लेकिन आज जब देशभर में पानी की समस्या सुरसा की तरह मुँह बाये खड़ी है तो एक-दो डायरेक्टर ही जोखिम उठाने को तैयार हैं। बॉलीवुड के डायरेक्टरों की एक बड़ी जमात अब भी इसे फ्लॉप प्लॉट या गैर-रोचक विषय मान रहा है।

    read more


    0 0


    .उत्तराखण्ड में इस साल मौसम ने फिर से करवट ली है। बेतरतीब बरसात और तूफान ने जहाँ लोगों के आवासीय भवनों की छतें उड़ाकर लील ली वहीं अत्यधिक वर्षा के कारण बादल फटने और बाढ़ के प्रकोप से लोगों की जानें खतरे में पड़ गई है। मौसम इतना डरावना है कि प्रातः ठीक-ठाक दिखेगा और सायं ढलते ही मौसम का विद्रुप चेहरा बनने लगता है।

    ज्ञात हो कि साल 2013 के बाद लोग इतने डरे-सहमें हैं कि थोड़ी सी बारिश और बादल के गरजने पर लोग अपने आशियाने को छोड़ने के लिये तैयार दिखते हैं। लोग अब यहाँ तक कहने को मजबूर हो रहे हैं कि पहाड़ में रहना ही जिन्दगी के साथ सबसे बड़ा चैंलेंज है।

    read more


    0 0

    Author: 
    मनोरमा सिंह

    .यूपीए सरकार के निर्मल भारत अभियान के बाद देश के मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दो साल पहले सत्ता में आते ही गाँधी जयन्ती के दिन स्वच्छ भारत अभियान की जोर-शोर से शुरुआत की थी और लक्ष्य ये रखा कि 2019 तक देश के हर घर में शौचालय होगा, खुले में शौच जाने वाले लोगों की संख्या लगभग खत्म हो जाएगी लेकिन अभी भी देश के लगभग 53.1 फीसदी घरों में शौचालय नहीं हैं।

    2011 की जनगणना के आँकड़ों के मुताबिक देश की कुल आबादी 1 अरब 21 करोड़ है जिसमें से 80 करोड़ से ज्यादा लोग बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं से महरूम हैं और जहाँ तक शौचालयों की बात है तो देश के कुल 46.9 फीसदी घरों में ही शौचालय हैं, शहरी आबादी में भी 19.6 फीसदी घरों में शौचालय नहीं हैं और ग्रामीण इलाकों के 69.3 फीसदी घर बगैर शौचालय के हैं।

    read more


    0 0


    .बुन्देलखण्ड का सूखा, एक नजीर बन चुका है। सो, स्थानीय संगठनों की पहल पर उत्तर प्रदेश का शासन कुछ नजीर पेश करने के मूड में दिखाई दे रहा है। उसने वहाँ 100 परम्परागत तालाबों के पुनर्जीवन की घोषणा की है; 50 तालाब महोबा में और 50 उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले शेष बुन्देलखण्ड में। खेत-तालाबों को लेकर एक घोषणा वह पहले कर ही चुका है।

    मनरेगा के तहत बुन्देलखण्ड में 4,000 हजार अन्य तालाबों के पुनर्जीवन की भी घोषणा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कर आये हैं। कहा जा रहा है कि मानसून आने से पूर्व यह काम पूरा कर लिया जाएगा। इन घोषणाओं को लेकर स्थानीय स्वयंसेवी संगठन भी अपनी पीठ ठोक रहे हैं और उत्तर प्रदेश शासन भी। घोषणा यदि बिना भ्रष्टाचार और समय पर जमीन पर उतरती है, तो यह पीठ ठोकने का काम है भी।

    read more


    0 0

    Author: 
    अवधेश मलिक

    .गर्मी बढ़ गई, पारा आसमान छूने को है, चारों ओर पानी के लिये त्राही-त्राही मची है। लेकिन छत्तीसगढ़ में दो तरफ से लोगों की मौत हो रही है वे बर्बाद हो रहे हैं। पहले तो वे हैं जिनके पास पीने, आजीविका चलाने, सिंचाई करने का पानी नहीं है जैसे की किसान।

    धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में 40 से ज्यादा किसानों ने मौत को गले सिर्फ इसलिये लगा लिया क्योंकि उनके पास अपने खेतों को सिंचने के लिये पानी नहीं था। दूसरे ओर वे लोग हैं जिनके पास पानी तो है लेकिन उनके पानी में धीमा जहर है और सेवन के साथ धीरे-धीरे मौत हो जाती है।

    read more


    0 0

    Author: 
    रीता सिंह
    Source: 
    दैनिक जागरण, 14 जून, 2016

    गंगा दशहरा, 14 जून 2016 पर विशेष



    .आज गंगा दशहरा है। पौराणिक मान्यता है कि राजा भगीरथ वर्षों की तपस्या के उपरान्त ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा को पृथ्वी पर लाने में सफल हुए। स्कन्द पुराण व वाल्मीकि रामायण में गंगा अवतरण का विशद व्याख्यान है। शास्त्र, पुराण और उपनिषद भी गंगा की महत्ता और महिमा का बखान करते हैं। गंगा भारतीय संस्कृति की प्रतीक है। हजारों साल की आस्था और विश्वास की पूँजी है। उसका पानी अमृत व मोक्षदायिनी है। गंगा का महत्त्व जितना धार्मिक व सांस्कृतिक है उतना ही आर्थिक भी।

    गंगा तट के आसपास देश की 43 फीसद आबादी का निवास है। प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से उनकी जीविका गंगा पर ही निर्भर है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश की लगभग 66 फीसद आबादी का मुख्य व्यवसाय कृषि है और सिंचाई की निर्भरता गंगा पर है।

    read more


older | 1 | .... | 43 | 44 | (Page 45) | 46 | 47 | .... | 65 | newer